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Showing posts from August, 2019

चित्रकोट जलप्रपात

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जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है छत्तीसगढ़ का नियाग्रा कहा जाने वाला जलप्रपात चित्रकोट। घोड़े के नाल आकार के इस जलप्रपात से जब बरसात के दिनों में इंद्रावती नदी नीचे गिरती है तो मंत्रमुगध कर देने वाला दृश्य बनता है जिसे देखने के लिए सारी दुनिया से पर्यटक यहाँ आते हैं वर्ष के बाकी दिनों में भी इस जलप्रपात की सुंदरता कम नही होती है।                                                   नीरज तेलंग

तीरथगढ़ जलप्रपात

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जगदलपुर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित है छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपातों में से एक तीरथगढ़ जलप्रपात। बरसात के दिनों में यह जलप्रपात जब अपने पूरे उफान पर होता है तब यह दृश्य देखते ही बनता है। ऊँचाई से गिरते इस जलप्रपात को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि सम्पूर्ण पहाड़ से ही जल सफेद मोतियों के समान झर रहा है और नीचे गिर कर जल की महीन बूंदे ओस की तरह चारों तरफ फैल जाती है और अद्भुद दृश्य बनाती है।                                           नीरज तेलंग

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

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जगदलपुर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान कांगेर घाटी। प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा कैलाश गुफा इस राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत ही आते है तथा प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात भी पास में ही है। घने जंगलों एवं पहाड़ खाई वाले इस वन में बहुत से वन्यजीवों की प्रजातियां पाई जाती है।                                                   नीरज तेलंग

मेन्द्री घुमर जलप्रपात

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जगदलपुर से लगभग 44 किलोमीटर की दूरी पर चित्रकोट से बारसूर जाने वाले मार्ग पर स्थित है मेन्द्री घुमर जलप्रपात। घोड़े की नाल के आकार की खाई पर ऊँचाई से गिरते इस जलप्रपात की सुंदरता बरसात के दिनों में देखते ही बनती है साथ ही हरे भरे पहाड़ एवं खाई का सुंदर दृश्य भी मन को मोह लेता है।                                           नीरज तेलंग

प्राचीन शिव मंदिर तीरथगढ़

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जगदलपुर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर तीरथगढ़ जलप्रपात के सामने ही स्थित ऊँचे चट्टान पर स्थित है प्राचीन शिव मंदिर। इस स्थान पर एक प्रमुख प्राचीन मंदिर के साथ ही अन्य छोटे छोटे मंदिर भी हैं जिनका जीर्णोद्धार कराया गया प्रतीत होता है तथा कुछ प्राचीन प्रतिमाएं भी यहाँ पर स्थापित है। मध्य में स्थित प्रमुख मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है तथा द्वार के ऊपरी भाग में भी पत्थरों पर मूर्तियाँ उकेरी गई है तथा अन्य मंदिरों में भी प्राचीन मूर्तियाँ स्थापित है। बरसात के दिनों में जब तीरथगढ़ जलप्रपात पूरे उफान पर होता है तो प्रपात से उठने वाली जल की महीन बूंदे इन मंदिरों के दृश्य को और भी सुंदर बनाती है।                                           नीरज तेलंग

प्राचीन शिव मंदिर चित्रकोट

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जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर चित्रकोट जलप्रपात से पाँच सौ मीटर पहले ही बायीं दिशा में सड़क से कुछ दूरी पर स्थित है चित्रकोट का प्राचीन शिव मंदिर। प्राचीन मंदिर के नाम पर विशाल शिवलिंग के साथ ही कुछ पत्थर के स्तंभ ही शेष रह गए हैं जिसे शेड बना कर सुरक्षित रखा गया है। विशाल जलहरी वाला यह शिवलिंग भग्नावस्था में है कहा जाता है कि आग लगने से यह छति हुई है। मंदिर के आसपास अन्य प्राचीन मूर्तियाँ एवं स्तम्भ भी स्थापित हैं।                                           नीरज तेलंग

चतुर्भुजी मंदिर धमधा

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रायपुर से लगभग 48 किलोमीटर की दूरी पर धमधा नामक स्थान पर तालाब के किनारे स्थित है भगवान विष्णु को समर्पित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर। पत्थर के बने इस मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है परंतु मंदिर काऊपरी भाग नही है।                                                 नीरज तेलंग

प्राचीन बूढ़ेश्वर शिव मंदिर धमधा

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रायपुर से लगभग 48 किलोमीटर की दूरी पर धमधा नामक स्थान पर तालाब के किनारे पर स्थित है। स्थानीय लोगों में यह प्राचीन शिव मंदिर बूढ़ेश्वर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है। 14वीं से 15वीं शताब्दि का मानेजाने वाले इस प्राचीन मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है।                                      नीरज तेलंग

नागदेव मंदिर नगपुरा

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दुर्ग से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर नगपुरा ग्राम के मध्य स्थित है 12 शताब्दि के आसपास की मानेजाने वाली पाशर्वनाथ की प्राचीन प्रतिमा। पाशर्वनाथ की इस प्रतिमा के सर के ऊपर फन फैलाये नाग की आकृति को दर्शाया गया है जिसके कारण स्थानीय लोगों में यह प्रतिमा नागदेव की प्रतिमा के रूप में जानी जाती है। इस स्थान पर भगवान गणेश तथा अन्य हिन्दू देवीदेवताओं की भी प्राचीन प्रतिमायें स्थापित है।                                                नीरज तेलंग

प्राचीन शिव मंदिर नगपुरा

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दुर्ग से लगभग 11 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है नगपुरा का प्राचीन शिव मंदिर।12वीं शताब्दि का मानेजाने वाला यह प्राचीन मंदिर एक तालाब के किनारे पर स्थित है। कलचुरी काल का मानेजाने वाले पत्थर से बने इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है तथा बाह्यभाग में भी भगवान गणेश ब्रम्हा तथा अन्य मूर्तियाँ बनी हुई है।                                        नीरज तेलंग