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बेनिपाठ शैलाश्रय

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रायगढ़ से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों के मध्य भैसगढ़ी नामक ग्राम में स्थित है बेनिपाठ शैलाश्रय। माँ बेनिपाठ के नाम से प्रसिद्ध इस स्थान पर देवी माँ की बहुत ही सुंदर मूर्ति स्थापित है। स्थानीय लोगों के अनुसार नवरात्रि के समय यहाँ पर धार्मिक आयोजन भी होता है। इस स्थान पर विशाल आकृति के कुछ बहुत सुंदर पत्थर हैं जिन्हें देख कर प्रतीत होता है कि ये प्राकृतिक नही है जबकि इस स्थान पर हजारों वर्ष पूर्व भी मनुष्य निवास करते थे। बेनिपाठ के शैलाश्रय में कुछ शैलचित्र भी दिखाई पड़ते हैं जो कि बहुत ही सुंदर है। इस स्थान की सुंदरता अद्भुद है।                                                         नीरज तेलंग

कबरा पहाड़ शैलाश्रय

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रायगढ़ से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम विश्वनाथपाली के समीप स्थित है कबरा पहाड़ का शैलाश्रय। लगभग 2000 फुट की ऊँचाई पर स्थित शैलाश्रय में अदिमकालीन मनुष्यों के द्वारा निर्मित शैलचित्र देखा जा सकता है। पथरीली दुर्गम चढ़ाई को पार कर यहाँ पहुँचा जा सकता है। ऊपर में एक चबूतरेनुमा स्थान है जिसकी चट्टानों पर ही शैलचित्र देखे जा सकते हैं। बहुत से चित्रों को यहाँ पर पहुँचने वाले लोगों के द्वारा छति पहुँचाई गई है और उनके ऊपर कुछ कुछ लिख दिया गया है।                                              नीरज तेलंग

दाही बोरा नरवा झरना

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रायगढ़ से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर परसदा गांव के पास स्थित है यह झरना। रायगढ़ बिलासपुर मुख्यमार्ग पर पहाड़ के ऊपर बहुत ही ऊँचाई से गिरता हुआ यह बहुत ही सुंदर झरना है, कई चरणों पर अलग-अलग ऊँचाई पर अलग झरना बनाते हुए ऊँची पहाड़ी से पानी नीचे आता है जो कि बहुत सुंदर दिखाई पड़ता है।                                                नीरज तेलंग                      

रनईदरहा झरना रायगढ़

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रायगढ़ से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर गेरवानी के पास एक ग्राम है देलारी जिसके पास ही है रनईदरहा झरना। इस झरने तक पहुँचने का कोई मार्ग नही है लगभग 1 किलोमीटर तक पथरीले नाले पर चलकर जाना पड़ता है। घने जंगलों के बीच मे स्थित है यह बहुत ही सुंदर झरना।                                                नीरज तेलंग

ओंगना शैलाश्रय रायगढ़

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रायगढ़ से लगभग 80 किलोमीटर तथा धरमजयगढ़ से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर है आदिम कालिन मनुष्यों के द्वारा बनाये गये विश्वविख्यात शैलचित्र। ओंगना ग्राम से लगकर छोटे खेतों और कुछ जंगल को पार कर के अदिमकालीन शैलचित्रों तक पहुँचा जा सकता है। छोटी सी पहाड़ी पर लगभग 200 फुट की ऊँचाई पर स्थित है यह स्थान। यहाँ पर स्टेज के समान बने हुए पहाड़ों पर शैलचित्र अंकित है तथा आसपास छोटी छोटी गुफाएं हैं संभवतः अदिमकालीन मानुष इन्ही गुफाओं में निवास करते थे।                                                 नीरज तेलंग

हावड़ा ब्रिज

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हावड़ा रेल्वे स्टेशन से बाहर निकलते ही लोहे का एक विशाल ढांचा खड़ा हुआ दिखाई पड़ता है जिसे हावड़ा ब्रिज के नाम से जाना जाता है जबकि बाद में इसका नाम रबिन्द्र सेतु रखा गया था। हावड़ा को कलकत्ता से जोड़ने वाले इस ब्रिज की विशालता देखते ही बनती और इस पर से हो कर गुजरना का अनुभव अदभुद है। बिना खंभो वाले इस पुल से लाखों वाहन इस पर से प्रतिदिन गुजरते है                            नीरज तेलंग

ताज महल आगरा

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ताज महल के विषय मे इतना अधिक लिखा गया और पढ़ा गया है कि कुछ कहने की आवश्यकता नही यह स्थान आगरा कैंट रेल्वे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहाँ पर बहुत ही भीड़भाड़ वाले और संकरे रास्तों से हो कर पहुँचा जा सकता है टिकट लेना और सुरक्षा जांच से गुजरना और चल कर ताजमहल के मुख्यद्वार तक पहुँचना लम्बी और थका देने वाली प्रकिया है और मुख्यद्वार से ताजमहल तक सुरक्षा जांच और घूम घूम कर पहुँचना और भी अधिक समय लेने वाला इस कारण पर्याप्त समय रख कर ही यहाँ पर पहुँचे तथा स्थानीय होटलों ऑटो टेक्सी तथा दुकानदारों से व्यवहार में सावधानी बरतें।                                           नीरज तेलंग