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Showing posts from September, 2019

कर्ण मन्दिर अमरकंटक

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अमरकंटक के प्राचीन मंदिर समूहों में से एक है कर्ण मन्दिर। ऊँचे चबूतरे पर बना यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। एक चबूतरे पर तीन गर्भगृहों वाला त्रिआयतन मंदिर कम ही होगा। तीन मंदिरों में से एक मंदिर का ऊपरी भाग नही है। 10वीं में निर्मित इस मंदिर का निर्माण कलचुरी नरेश कर्णदेव के द्वारा किया गया है माना जाता है।                                                   नीरज तेलंग

पंचमठा मंदिर अमरकंटक

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अमरकंटक के प्राचीन मंदिर समूह में ही स्थित है पंचमठा मंदिर। एक ही चबूतरे पर पांच मंदिर होने के कारण इन मंदिरों को पंचमठा मंदिर कहा जाता है। 15वीं से 16वीं शताब्दि में निर्मित इन मंदिरों का निर्माण गोंड राजाओं के द्वारा करवाया माना जाता है।                                                   नीरज तेलंग

केशव नारायण मंदिर अमरकंटक

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अमरकंटक के प्राचीन मंदिर समूहों में से एक है केशव नारायण मंदिर। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। ऊँचे चबूतरे पर बने इस मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण कलचुरी कालीन 11वीं से 12वीं शताब्दि का माना जाता है।                                                 नीरज तेलंग

मछेन्द्रनाथ मंदिर अमरकंटक

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अमरकंटक के प्राचीन मंदिर समूह में से एक है मछेन्द्रनाथ मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मछेन्द्रनाथ इस क्षेत्र में शैव सम्प्रदाय की एक शाखा के प्रवर्तक थे। इस मंदिर का निर्माण कलचुरी कालीन 11वीं से 12वीं शताब्दि का माना जाता है।                                                 नीरज तेलंग

पातालेश्वर मंदिर अमरकंटक

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अमरकंटक के प्राचीन मंदिर समूहों में से एक है भगवान शिव को समर्पित पातालेश्वर मंदिर। इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दि का कलचुरी नरेश कर्णदेव के द्वारा करवाया गया था माना जाता है तथा कुछ मान्यताओं में आदि शंकराचार्य के द्वारा इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की भी बात सामने आती है।  मंदिर का गर्भगृह गहराई पर है संभवतः इस कारण से मंदिर को पातालेश्वर का नाम दिया गया हो।                                                   नीरज तेलंग

जुहिला मंदिर अमरकंटक

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अमरकंटक में नर्मदा उद्गम स्थल से कुछ ही दूरी पर प्राचीन मंदिरों का समूह है इन्ही मंदिरों में से एक जुहिला मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दि का गहोरा के बघेल शासकों का माना जाता है। जुहिला नदी को समर्पित यह मंदिर ऊँचे चबूतरे पर स्थित है तथा गर्भगृह में जुहिला माता की खंडित प्रतिमा स्थापित है।                                                   नीरज तेलंग

श्री यंत्र मंदिर अमरकंटक

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अमरकंटक में सोन नदी उद्गम मार्ग पर स्थित है श्री यंत्र मंदिर। वर्तमान में यह विशाल मंदिर के द्वार बंद है इस कारण मंदिर के अंदर प्रवेश करना संभव नही है।                                               नीरज तेलंग

माई की बगिया अमरकंटक

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अमरकंटक में नर्मदा उद्गम स्थल से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है माई की बगिया। इस स्थान पर एक कुंड है जिसके निकट नर्मदा माता की प्रतिमा स्थापित की गयी है। कहा जाता है कि इस स्थान पर माता नें अपना बाल्यकाल सखी गुलबकावली के साथ व्यतीत किया है। पहाड़ों एवं घने जंगलों के मध्य कलकल करती जलधाराओं के मध्य स्थित यह स्थान बहुत ही सुंदर है।                                                नीरज तेलंग

दूधधारा जलप्रपात अमरकंटक

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अमरकंटक से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर कपीलधारा के पास ही स्थित है दूधधारा जलप्रपात। उद्गमस्थल से निकलने बाद नर्मदा नदी कपीलधारा जलप्रपात बनाती है तथा उस से कुछ आगे चलकर दूधधारा नामक जलप्रपात बनाती है। दूधधारा जलप्रपात की ऊँचाई अधिक नही है परंतु वेग से गिरने के कारण यह जलप्रपात दूध की तरह उजला दिखाई पड़ता है। यह स्थान दुर्वासा ऋषि की तपस्या स्थली है इस कारण पूर्व में इस जलप्रपात को दुर्वासाधारा कहा जाता था जो कि बाद में दूधधारा हो गया।                                                   नीरज तेलंग

कपिलधारा जलप्रपात अमरकंटक

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अमरकंटक से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कपिलधारा जलप्रपात। कपिल मुनि के नाम पर इस जलप्रपात का नाम कपीलधारा पड़ा है। उद्गम स्थल से निकलने के लगभग छः से सात किलोमीटर की दूरी पर नर्मदा नदी यह जलप्रपात बनाती है। ऊँचाई से गिरते हुए इस जलप्रपात की सुंदरता देखते ही बनती है।                                                 नीरज तेलंग

सोन नदी उद्गम स्थल अमरकंटक

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पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन से लगभग 32 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध तीर्थस्थल अमरकंटक। अमरकंटक नर्मदा नदी के साथ ही दो अन्य नदियों का भी उद्गमस्थल है इनमें से एक है सोन नदी। नर्मदा उद्गम स्थल से लगभग दो किलोमीटर दूरी पर हुआ है सोन नदी का उद्गम। सोन नदी का उद्गम एक बहुत ही छोटे कुंड से हुआ है तथा उद्गम स्थल से कुछ ही दूरी पर ही यह नदी ऊँचे पहाड़ से नीचे गिरती है और बहुत ही सुंदर जलप्रपात बनाती है।                                                   नीरज तेलंग

नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक

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पेंड्रा रोड रेल्वे स्टेशन से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है अमरकंटक। यह मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थानों में से एक नर्मदा नदी का उद्गम स्थल। अनूपपुर जिले के अंतर्गत आने वाले अमरकंटक के जंगलों की सुंदरता देखते ही बनती है यहाँ पर ऊँचे पहाड़ों पर से दिखाई पड़ने वाला दृश्य अद्बुध होता है। नर्मदा नदी उद्गम स्थल के दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक अमरकंटक पहुँचते है। नर्मदा जैसी विशाल नदी का उद्गम एक कुंड से हुआ है यहाँ पर कुंड से लग कर नर्मदा माता के मंदिर के साथ ही और भी कई मंदिर स्थापित है इन मंदिरों की श्रृंखला की सुंदरता देखते ही बनती पास ही में एक छोटे से पत्थर के हांथी की मूर्ती भी स्थापित है जिसके नीचे से रेंग कर निकलनें की परंपरा हैं।                                                नीरज तेलंग

बारा बखरा वाटरफॉल

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बरगढ़ से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ओडिसा का एक बहुत ही सुंदर वाटरफॉल। घने जंगलों के बीच में स्थित इस वाटरफॉल के पास लगभग दो से तीन किलोमीटर की दूरी पथरीले ऊबड़खाबड़ रास्तों से हो कर किसी जानकार व्यक्ति की सहायता से ही इस स्थान पर पहुँचा जा सकता है।                                       नीरज तेलंग