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Showing posts from November, 2018

काली मंदिर सारंगढ़

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सारंगढ़ में ही स्थित है काली माता का मंदिर, इस मंदिर में स्थापित भैरवनाथ तथा गणों की प्राचीन मूर्तियों को कलचुरी काल लगभग 11वीं से 12वीं शताब्दि का बताया जाता है। स्थानीय निवासियों की आस्था के केंद्र इस मंदिर में बहुत ही सुन्दर दृश्य तब दिखाई पड़ता है जब बरसात के समय मंदिर से लग कर बहने वाला घोघरा नाला उफान पर होता है और मंदिर तक जाने वाले मार्ग के ऊपर से हो कर बहता है इस दृश्य को देखने बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुँचते हैं। नीरज तेलंग

ताला शिव मंदिर सारंगढ़

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सारंगढ़ से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर रायपुर मार्ग में तालाब के किनारे स्थित है ताला का शिव मंदिर। आसपास के ग्रामवासियों की आस्था के केंद्र इस शिव मंदिर में कलचुरी कालीन लगभग 11वीं से 12वीं शताब्दि की मूर्तियाँ भी स्थापित है। नीरज तेलंग

शिव मंदिर घटियारी

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राजनांदगांव से लगभग 80 किलोमीटर की दुरी पर गंडई के बिरखा ग्राम के पास घटियारी तालाब के किनारे पर स्थित है प्राचीन शिव मंदिर। लगभग 10वीं से 11वीं शताब्दि के ध्वस्त हो चुके इस प्राचीन मंदिर का गर्भगृह सुरक्षित है जिस में शिवलिंग स्थापित है तथा पत्थर से बने मंदिर के चौखट का कुछ भाग और मंदिर के स्तम्भ भी बचे हुए हैं जिन पर विभिन्न प्रकार की आकृतियां उकेरी गई है। मुख्य मंदिर के आसपास अन्य कई मंदिरों के होने की बात कही जाती है जिनमें से दो मंदिरों का आधार भाग बचा हुआ है तथा उन में भी शिवलिंग स्थापित है इसके साथ ही एक अन्य शिवलिंग तथा गणेश नंदी की प्रतिमाओं का साथ ही अन्य प्रतिमाएं भी स्थापित है। नीरज तेलंग

शिव मंदिर गंडई

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राजनांदगांव से लगभग 75 किलोमीटर की दुरी पर कवर्धा मुख्यमार्ग पर गंडई नामक स्थान पर स्थित है 11वीं शताब्दि के आसपास का प्राचीन शिव मंदिर। बहुत ही सुन्दर इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है तथा संपूर्ण मंदिर ही नक्काशी किये हुए पत्थरों से निर्मित है जिस पर विभिन्न आकृतियां उकेरी गई है। नीरज तेलंग

शिव मंदिर सहसपुर

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बेमेतरा से लगभग 35 किलोमीटर की दुरी पर दुर्ग मुख्यमार्ग से लगकर कुछ ही दूरी पर सहसपुर नामक ग्राम में स्थित है प्राचीन शिव मंदिर। सोलह स्तंभो वाले इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण 13वीं से 14वीं शताब्दि का होना बताया जाता है। इसके पास ही में ही एक और प्राचीन मंदिर स्थापित है जिसे बजरंग बली मंदिर के नाम से जाना जाता है। नीरज तेलंग

बजरंग बली मंदिर सहसपुर

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बेमेतरा से लगभग 35 किलोमीटर की दुरी पर दुर्ग मुख्य मार्ग से कुछ दूरी पर सहसपुर नामक ग्राम में स्थित है लगभग 13वीं से 14वीं शताब्दि का प्राचीन मंदिर। स्थानीय ग्रामवासियों के द्वारा गर्भगृह में बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित कर दिए जाने के कारण इस मंदिर का नाम बजरंग बली मंदिर पड़ गया है। इस मंदिर के निकट ही प्राचीन शिव मंदिर भी स्थापित है। नीरज तेलंग

चतुर्भुजी मंदिर तितुर्घाट

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दुर्ग से लगभग 40 किलोमीटर की दुरी पर धमधा के पास तितुर्घाट नामक ग्राम में शिवनाथ नदी के तट पर स्थित है प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर। प्राचीन मंदिर के स्थान पर वर्तमान में नए मंदिर का निर्माण हो चूका है परंतु मंदिर के गर्भगृह में चतुर्भुजी प्रतिमा स्थापित है नए निर्मित मंदिर के पास प्राचीन मंदिर के अवशेषों को बिखरा हुआ देखा जा सकता है तथा सामने ही वृक्ष के नीचे खंडित प्रतिमाओं को भी रखा गया है। नीरज तेलंग

विष्णु मंदिर अहिवारा

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दुर्ग से लगभग 25 किलोमीटर और रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर की दुरी पर धमधा रोड पर अहिवारा के बानवरद नमक ग्राम में स्थित है प्राचीन विष्णु मंदिर। एक चौकोर सीढ़ीदार बावड़ी के किनारे स्थित इस मंदिर का निर्माण 16वीं से 17वीं शताब्दि का बताया जाता है। प्राचीन मंदिर के गर्भगृह में भागवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है जिनके दर्शन करने दूर दूर से लोग आते हैं। नीरज तेलंग