पाँचवी शताब्दि का जीवंत नगर - सिरपुर
रायपुर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर महानदी के किनारे स्थित है सोमवंशी राजाओं के द्वारा बसाया गया 5वी शताब्दि का नगर सिरपुर।
श्रीपुर तथा शिरपुर के प्राचीन नाम वाले इस नगर में 6वी से 8वी शताब्दि के शैव तथा बौद्ध मंदिरों के कई अवशेष पाए गए हैं, माना जाता है सिरपुर के शासक बौद्ध थे जो कि आगे चल कर शैव मत के अनुयायी हो गये थे।
सिरपुर खुदाई में निकले स्थानों में ईंटो से बना लक्ष्मण मंदिर, तीवरदेव बौद्ध मंदिर, सुरंगटिला शिव गणेश मंदिर, गंधेश्वर शिव मंदिर, वैधशाला, बौद्ध स्तूप, स्वस्तिक विहार जैसे कई प्रसिद्ध स्थल है।
लक्ष्मण मंदिर ईटों से बना एशिया का सबसे प्राचीन मंदिर है जो कि विश्वप्रसिद्ध है पास में राम मंदिर भी है परंतु उसके कुछ स्तम्भ ही बचे रह गए है।
तीवरदेव बौद्ध मंदिर की भव्यता का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इतनी बड़ी संख्या में अन्यत्र कहीं भी बुद्ध मंदिरों से संबंधित अवशेष नही प्राप्त हुए है, कहा जाता है कि 6वी शताब्दि में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग भी सिरपुर आया था।
सुरंगटिला अपनी तरह की एक विशाल तथा सुंदर आकृति है जो की देखने के लायक है पिरामिड से सामान दिखने वाले इस मंदिर में सीढियां से ऊपर चढ़ कर पहुँचा जा सकता है, यहाँ पर शिव मंदिरों के साथ ही एक गणेश मंदिर भी है।
गंधेश्वर शिव मंदिर में प्राचीन मूर्तियों के साथ मुख्य स्तम्भ भी सुरक्षित है, महानदी के किनारे बने ईस मंदिर का धार्मिक महत्व वर्तमान में भी बहुत अधिक है।
इन प्रमुख मंदिरों के साथ ही अन्य कई शिव मंदिर हैं तथा बौद्ध मंदिर है एक वैधशाला, राजमहल के साथ ही बौद्ध स्तूप भी देखने योग्य है।
नीरज तेलंग
Comments
Post a Comment