बसनाझर
रायगढ़ से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर खरसिया के पास में है बसनाझर के प्रसिद्ध शैलचित्र।
रायगढ़ के आसपास जितने भी शैलचित्र है उनमें सबसे अधिक कठिन है बसनाझर के शैलचित्रों तक पहुँचना। अन्य स्थान के शैलचित्रों तक पहुँचने के लिए पहाड़ी पर सीधी चढ़ाई करनी पड़ती हैं परंतु यहाँ पर पहाड़ के पीछे से चढ़ाई प्रारम्भ कर शिर्ष से होते हुए पहाड़ सामने की आधी दूरी तक अत्यंत दुर्गम पहाड़ी मार्ग से उतारना पड़ता है। यही कारण है कि आसपास में कोई जानकर व्यक्ति मिलना भी कठिन है। हमें भी शैलचित्रों तक पहुँचने के लिए जानकर व्यक्ति ढूंढने में बड़ी समस्या आई और जो व्यक्ति अंततः मिला उसने भी हमें पहाड़ पर कई बार मार्ग भटकने के बाद ही उचित स्थान तक पहुँचाया।
पहाड़ पर ऊँची खड़ी दुर्गम चट्टानों पर हैं बसनाझर के शैलचित्र, इन शैलचित्रों को ठीक से देखने के लिए और वहाँ पर खड़े ही रहपाने के लिए कोई समतल धरातल नही है ऊबड़खाबड़ चट्टानों पर ही खड़े हो कर ही इन शैलचित्रों को देखा जा सकता है।
बसनाझर के पहाड़ पर चढ़ना बहुत ही घातक हो सकता है क्योंकि एक चट्टान से दूसरे चट्टान की दूरी कुछ स्थान पर बारह फुट तक है ऐसे में फिसल के गिरने का भय बना रहता है साथ ही निर्जन पहाड़ होने के कारण भालू जैसे जंगली जानवर इस स्थान पर स्वक्षन्द रूप से घूमते हैं।
नीरज तेलंग
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